“क्या आपको CRM चाहिए?” यह सवाल आमतौर पर तब उठता है, जब पूछताछ बढ़ने लगती है, बातचीत अलग-अलग मैसेंजरों में बिखर जाती है और कुछ लोगों के संदेश छूट जाते हैं। व्यवसाय के बढ़ने में यह एक स्वाभाविक पड़ाव है।
अगर आपकी कंपनी में प्रबंधन लेखांकन अभी स्थिर रूप से व्यवस्थित नहीं है, तो केवल बिक्री को व्यवस्थित करना पर्याप्त नहीं हो सकता: आपको अलग से यह भी देखना होगा कि परियोजनाओं के भीतर पैसे के साथ क्या हो रहा है। प्रबंधन लेखांकन व्यवस्थित न होने पर आप बिक्री तो तेज़ कर सकते हैं, लेकिन साथ ही नकदी की कमी भी बढ़ा सकते हैं।
आगे हम उस स्थिति पर विचार करेंगे, जिसमें पहले लेखा-जोखा व्यवस्थित किया जाता है और फिर CRM का निर्णय लिया जाता है। साथ ही देखेंगे कि 101 ऐप के ज़रिए लेखा-जोखा कैसे रखा जा सकता है।
विषय-सूची:
- CRM से क्या हल होता है और क्या नहीं?
- लेखा-जोखा व्यवस्थित होने से पहले CRM अक्सर कम असरदार क्यों रहता है?
- CRM से पहले किस तरह का लेखा-जोखा चाहिए?
- 101 ऐप में लेखा-जोखा लागू करने की संक्षिप्त योजना
- CRM पर दोबारा विचार करने का समय: तैयार होने के संकेत
- CRM और लेखा-जोखा साथ कैसे चलाएँ, ताकि डेटा दोहराना न पड़े?
CRM से क्या हल होता है और क्या नहीं?
CRM बिक्री का प्रबंधन करने के लिए चाहिए: संपर्क जानकारी सहेजने, तय हुई बातों को दर्ज करने, सौदों को अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाने, रूपांतरण दर की गणना करने और बिक्री प्रबंधकों के काम पर नज़र रखने के लिए।
हालाँकि, CRM अपने-आप संभावित ग्राहक नहीं लाता। पूछताछ मार्केटिंग और साझेदारों के माध्यम से आती है; CRM उसे बिना खोए संभालने में मदद करता है।
निर्माण और फिनिशिंग के काम में अक्सर एक साधारण समस्या सामने आती है: मालिक साइटों और आपूर्ति में व्यस्त रहता है, पूछताछ उसके निजी फ़ोन पर आती है, कुछ संदेशों का जवाब नहीं दिया जाता और बाद में बातचीत का पिछला विवरण दोबारा मिलना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में CRM वास्तव में मानसिक बोझ कम करता है।
लेखा-जोखा व्यवस्थित होने से पहले CRM अक्सर कम असरदार क्यों रहता है?
CRM लागू करने में लगभग हमेशा समय लगता है: चरण, भूमिकाएँ, काम के नियम और एकीकरण व्यवस्थित करने होते हैं, लोगों को एक ही तरीके से काम करना सिखाना होता है। रोज़मर्रा के कामों के बीच यह मालिक और टीम का समय व संसाधन लेता है।
अगर उसी समय वित्तीय अनुशासन कमज़ोर पड़ रहा हो, तो आप तात्कालिक समस्याएँ सुलझाने में उलझ जाते हैं। टीम “अंदाज़े से” काम करती है और फैसले तथ्यों के बिना लिए जाते हैं: साइट पर अब तक कितना पैसा खर्च हो चुका है, काम की लाभप्रदता कितनी है, किसे खर्च का हिसाब देने की शर्त पर रकम दी गई है और सामग्री के लिए अगला भुगतान कब करना है।
एक आम स्थिति यह है: आप बिक्री में निवेश करते हैं, लोगों को नियुक्त करते हैं, व्यवस्था लागू करने के लिए पैसे देते हैं और महीने के अंत में पता चलता है कि वेतन और साइटों के अग्रिम भुगतानों के लिए पैसे कम पड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में केवल CRM लागू करना पर्याप्त नहीं है: पैसे और लाभ से जुड़े सवालों के लिए प्रबंधन लेखांकन के आँकड़े चाहिए।
CRM से पहले किस तरह का लेखा-जोखा चाहिए?
अगर प्रबंधन लेखांकन अभी व्यवस्थित नहीं है, तो पहले यह तय करें कि निर्णय लेने के लिए किन आँकड़ों की ज़रूरत है। इसका उद्देश्य व्यवसाय की “आज की” स्थिति दिखाना और आपको प्रबंधन के साधन देना है: लाभ, खर्च, पैसे की आवाजाही और परियोजनाओं की कार्यकुशलता।
परियोजना आधारित व्यवसाय में यह लगभग हमेशा साइटों यानी परियोजनाओं और उनसे जुड़े वास्तविक आँकड़ों के आधार पर बनता है: प्राप्त रकम, खर्च, बकाया, शेष राशि और परिणाम। लेखा-जोखा कैसे व्यवस्थित करें, इसकी विस्तृत चर्चा “परियोजना आधारित व्यवसाय में प्रबंधन लेखांकन: कैसे व्यवस्थित करें” लेख में है।
CRM से पहले कम-से-कम ये चीज़ें व्यवस्थित करना उपयोगी है:
- हर साइट का शेष: प्राप्त रकम में से दर्ज किए गए खर्च घटाएँ। परियोजना के लाभ का आकलन अलग से करें, ग्राहक के लिए तय कीमत की तुलना लागत से करके।
- खर्च का हिसाब देने की शर्त पर दी गई रकम का लेखा-जोखा: किसे दी गई, किस आधार पर उसका हिसाब पूरा किया गया और क्या लौटाना या किस रकम का हिसाब देना बाकी है।
- मुख्य खर्च मदों के लिए योजना और वास्तविक आँकड़े: सामग्री, काम, डिलीवरी, किराया और ठेकेदार।
- निगरानी का नियमित क्रम: हफ़्ते में एक बार संक्षिप्त जाँच और महीने का समेकित परिणाम।
- मूल दस्तावेज़ों को डिजिटल रूप में व्यवस्थित रखना: रसीदें, काम के प्रमाण-पत्र, अनुबंध और साइट की रिपोर्ट।
101 ऐप में लेखा-जोखा लागू करने की संक्षिप्त योजना
101 ऐप काम की जगह से ही प्रबंधन लेखांकन के आँकड़े इकट्ठा करने में मदद करता है: साइट से जुड़ी घटनाएँ दर्ज करना, QR कोड से रसीदें स्कैन करना, दस्तावेज़ सहेजना और परियोजनाओं का विश्लेषण देखना।
लागू करने का तरीका सरल है: पहले ढाँचा तैयार करें, फिर यह नियम बनाएँ कि “वास्तविक आँकड़े लेन-देन वाले दिन ही सिस्टम में दर्ज होंगे”, और उसके बाद निगरानी का नियमित क्रम तय करें।
- चरण 1. तय करें कि आपके यहाँ परियोजना किसे माना जाएगा—साइट, अनुबंध या ऑर्डर—और सिस्टम में परियोजनाएँ बनाएँ।
- चरण 2. परियोजनाओं के लिए ज़िम्मेदार लोग तय करें और उन प्रतिभागियों को जोड़ें, जो पैसा खर्च करते हैं और उसका हिसाब देते हैं: साइट पर्यवेक्षक, आपूर्ति प्रभारी और मास्टर कारीगर।
- चरण 3. प्रबंधन संबंधी निर्णयों के लिए ज़रूरी खर्च मदें तय करें। 10–15 मदों से शुरू करें, फिर उन्हें और विस्तार से बाँटें।
- चरण 4. नियम बनाएँ: खर्च तुरंत दर्ज किया जाए, रसीद QR कोड या फ़ोटो के ज़रिए जोड़ी जाए और घटना को साइट से जोड़ा जाए।
- चरण 5. खर्च का हिसाब देने की शर्त पर दी जाने वाली रकम की व्यवस्था बनाएँ: रकम देना, उसका हिसाब पूरा करना और हर व्यक्ति के पास बची ऐसी रकम पर नज़र रखना, जिसका हिसाब अभी बाकी है।
«Балансы» (शेष राशियाँ) टैब में अपनी रकम का शेष, खर्च का हिसाब देने की शर्त पर दी गई रकम का शेष, परियोजनाओं के अनुसार रकम और «Переплата или не созданы отчёты» (ज़रूरत से ज़्यादा भुगतान या रिपोर्ट नहीं बनाई गई हैं) संकेतक दिखाई देता है। यह संकेतक ज़रूरत से ज़्यादा भुगतान या अभी तक रिपोर्ट न बनाए जाने—दोनों में से किसी कारण को दर्शा सकता है; कारण अलग से जाँचें। इंटरफ़ेस रूसी में है। - चरण 6. हफ़्ते में एक बार साइटों का शेष और “टीम से पूछने वाले सवालों” की सूची देखें। महीने में एक बार लाभ और लाभप्रदता का परिणाम दर्ज करें।
दो में से पहला फ़्रेम। «56 | ЖК Северный парк» परियोजना के गैंट चार्ट में «План-факт» (योजना–वास्तविक) मेन्यू खुला है, जिसमें «Прибыль» (लाभ) विकल्प उभारा गया है। इस मोड के संख्यात्मक मानों वाला पॉप-अप अगले फ़्रेम में दिखाया गया है। इंटरफ़ेस रूसी में है। दो में से दूसरा फ़्रेम: «Прибыль» (लाभ) चुनने के बाद वही परियोजना। पॉप-अप में «План: 1 491 000,00» (योजना), «Факт: 60 000,00» (वास्तविक मान) और «Факт от плана: 4,02%» (योजना के अनुपात में वास्तविक मान) दिखते हैं। आख़िरी संकेतक वास्तविक मान का योजनाबद्ध मान से अनुपात है। पिछले फ़्रेम में इसी मोड का मेन्यू दिखता है। इंटरफ़ेस रूसी में है।
अगर आप जल्दी समझना चाहते हैं कि लेखा-जोखा आपकी प्रक्रियाओं में कैसे फिट होगा, तो मुफ़्त प्रस्तुति में आइए: हम दिखाएँगे कि 101 ऐप में खर्च, साइटों का लाभ और मालिक के लिए रिपोर्ट कहाँ मिलती हैं।
CRM पर दोबारा विचार करने का समय: तैयार होने के संकेत
“क्या आपको CRM चाहिए?” इस सवाल पर तब लौटना उपयोगी है, जब लेखा-जोखा स्थिर रूप से चल रहा हो और आप तालिकाएँ हाथ से मिलाए बिना परियोजनाओं की आर्थिक स्थिति देख पा रहे हों। तब CRM काम को मज़बूत करेगा और केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए शुरू की गई अलग परियोजना नहीं बनेगा।
इन संकेतों के आधार पर अपनी तैयारी जाँचें:
- आप हर साइट की लाभप्रदता देख सकते हैं और समझते हैं कि वह किन चीज़ों से बनती है।
- खर्च का हिसाब देने की शर्त पर दी गई रकम महीनों तक बिना हिसाब के नहीं पड़ी रहती, बकाया स्पष्ट होता है और निर्णय वास्तविक आँकड़ों के आधार पर लिए जाते हैं।
- पूछताछ को केवल “याददाश्त और मैसेंजरों” के सहारे संभालना अब संभव नहीं है: कई माध्यम हैं और कई लोग उसे संभालते हैं।
- बिक्री और आने वाली पूछताछ को अच्छी तरह संभालने के लिए एक अलग ज़िम्मेदार भूमिका मौजूद है।
- आप एक जैसे नियम लागू करने के लिए तैयार हैं: संभावित ग्राहक किसे माना जाएगा, सौदा कब खोया हुआ माना जाएगा और जवाब देने की कितनी अवधि स्वीकार्य है।
CRM और लेखा-जोखा साथ कैसे चलाएँ, ताकि डेटा दोहराना न पड़े?
एक संभावित तरीका यह है: अनुबंध होने तक ग्राहक और सौदा CRM में संभालें, और अनुबंध के बाद परियोजना तथा पैसे व काम के निष्पादन से जुड़े वास्तविक आँकड़े 101 ऐप में रखें। 101 ऐप में अपने सौदे और बिक्री फ़नल भी हैं। काम का यह बँटवारा एक विकल्प है; चुनते समय अपने सिस्टमों की क्षमताओं और सेटिंग को ध्यान में रखें।
डेटा दो बार दर्ज करने से बचने के लिए पहले ही तय करें कि हर प्रकार की जानकारी का मुख्य भरोसेमंद स्रोत कहाँ होगा। संपर्क जानकारी और बातचीत का इतिहास CRM में रहेगा; साइट के वित्तीय घटनाक्रम और दस्तावेज़ लेखा-जोखे में रहेंगे। इन्हीं बातों से सही मानदंडों के आधार पर CRM चुनना शुरू होता है। ब्लॉग में निर्माण या फिनिशिंग कंपनी के लिए CRM कैसे चुनें (रूसी में) पर विस्तृत चर्चा है।
अगर आपको संदेह है कि अभी CRM पर काम शुरू करना चाहिए या नहीं, तो “क्या आपको CRM चाहिए: लागू करने का निर्णय टालने के कारण” (रूसी में) लेख देखें। यह उस भावना से बाहर निकलने में मदद करता है कि CRM के बिना व्यवसाय “पीछे रह जाता है”।











